
किसान तेलहन उत्पादन को आजीविका से जोड़ा : मयंक मुरारी
किसानों को आत्मनिर्भर बनाना उद्देश्य @ 20 एकड़ में सरसों की हुई खेती

Arjun Kumar Pramanik……..✍️
रांची । उषा मार्टिन फाॅउंडेशन द्वारा एक किसानों के आय में वृद्धि के लिए तेलहन को मध्यम बनाया गया है। 30 से अधिक किसानों को बीज, मल्चिंग, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग देकर सरसों की खेती करायी गयी है। फाउंडेशन के हेड डॉ मयंक मुरारी ने बताया कि इस सहयोग से अनगड़ा एवं नामकुम प्रखंड के अंतर्गत आने वाले 18 से 20 गाँवों के 30 किसानों को सरसों का बीज वितरित किया गया।इस बीज को लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि में लगाया गया है। डा मयंक मुरारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य रबी मौसम में किसानों को नकदी फसल की ओर प्रेरित करना तथा उनकी कृषि आय में वृद्धि करना है। गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से किसानों में उत्साह देखा गया और उन्होंने समय पर सरसों की बुवाई की। इसके पहले दलहन, सब्जी, मटर और स्ट्रोबेरी की खेती से किसानो को जोड़ा जा चुका है । फाउंडेशन के एंग्री बिजनेस हेड मेवालाल महतो ने बताया कि बीज वितरण के साथ-साथ किसानों को फसल की बुवाई, देखभाल एवं उत्पादन बढ़ाने से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी गई। टीम द्वारा खेतों का समय-समय पर निरीक्षण कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है । किसानों का कहना है कि सरसों की खेती से उन्हें अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। यह पहल न केवल खेती में विविधता लाने में सहायक होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर तेलहन उत्पादन को भी बढ़ावा देगी । उषा मार्टिन फाॅउंडेशन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों को दीर्घकालीन लाभ मिलने की उम्मीद है। सरसों की खेती से किसानों को अतिरिक्त नकद आय प्राप्त होना
खेती में विविधता लाकर जोखिम में कभी लायेगा।

