Advertisements
Spread the love

रांची : पंचायती राज का सपना धरातल में कहां तक सच हो पाया है ? 

दिवाकर व दीपक… ✍️

पंचायती राज को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना होगा कि, यह विचार-कब और क्यों जन्म लिया। पंचायती राज व्यवस्था का विषय काफी बृहत है। संक्षेप में समझने के लिए, गांवों को एक विशेष शक्ति दी गई है जो अपने जरुरतों को पुरा करने के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकता है। इस प्रणाली में शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया गया है। सरकारी तंत्र अपने ईच्छा अनुसार विकास का पैसा खर्च नहीं कर सकता है। ग्राम सभा और पंचायती चुनाव से जीत कर आया प्रतिनिधियों की ओर से स्वीकृती लेनी होती है । अनेक जगहों में देखा गया है कि, पंचायती चुनाव जीत कर आएं में हे कुछ प्रतिनिधि पंचायती राज के अधिकार और नियमों के ज्ञान के अभाव में प्रखंड कार्यालयों में मुकी खानी पड़ती है। वह यहीं से आरंभ हो जाती है अफसर शाही और गांवों को सशक्तिकरण करने की परिकल्पना दम तोड़ देती है।

Advertisements

पंचायती राज मे धरातल की क्या स्थिति है जानने के लिए रुख करते है, जिला- पूर्वी सिंहभूम, अनुमंडल- घाटशिला प्रखंड – मुसाबनी के अंतर्गत पूर्वी बादिया के प्रज्ञा केंद्र में आर्थिक तंगी और लगातार बढ़ते काम के दबाव के बीच पंचायत में पदस्थापित एक प्रज्ञा केंद्र संचालक नया राम हेम्ब्रम के असमय मृत्यु हो जाने परिवार वाले जहां बिलाप कर रहे हैं वहीं गांव मे शोक की लहर फैल गई है।

स्व. नया राम हेम्ब्रम

मिली जानकारी के अनुसार नया राम हेम्ब्रम, जो पूर्वी बधिया पंचायत में प्रज्ञा केंद्र संचालक के रूप में कार्यरत थे। बताया जाता है कि पंचायत स्तर पर काम करने वाले प्रज्ञा केंद्र संचालकों को सरकार की ओर से हर महीने लगभग 2475 रुपये मानदेय दिया जाता था। अर्थात, प्रज्ञा केंद्र संचालक को प्रति दिन आय मात्र 95 रुपये होता है। बता दूं कि, पुरे राज्य में प्रज्ञा केंद्र संचालित ठेकेदारी प्रणाली से किया जाता है। सरकारी व्यवस्था तंत्रों ने प्रत्येक प्रज्ञा केंद्र का संचालन व्याय के रुप में प्रति माह 7550 रुपए मुहैया करवाया जाता है। अब 7550 रुपए में से ठेकेदार को अपनी आय, केन्द्र को संचालित करने का व्याय, इसके बाद जो बचता है वह प्रज्ञा केंद्र संचालक को दिया जाता है। सोच कर देखिए जरा, 2475 रुपए में प्रज्ञा केंद्र संचालक अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करें। जबकि, प्रज्ञा केंद्र संचालित करने का व्याय राशि 7550 रुपए वर्ष 2023 पर आधारित है। झारखंड राज्य के 2023 में न्यूनतम मजदूरी दर 9162 रुपए प्रति माह हुआ करता था, यानी इस हिसाब हूं प्रति दिन मजदूरी दर 352 रुपये होता था । ताज्जुब की बात यह है कि, एक तरफ अपने राज्य का मजदूरी दर सरकार खुद ही निर्धारित करते हैं और अपने ही अधिनस्थ प्रज्ञा केंद्र में न्यूनतम मजदूरी को नजरंदाज किया गया !

बहरहाल, नया राम हेम्ब्रम अपने पीछे दो पुत्री और एक पुत्र छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सवाल यह है कि, लाचार – असहाय इस परिवार का पहिया अब कैसे आगे बढ़ेगा ? ऐसी ही स्थिति न जाने पंचायती राज के तहत चलने वाले भिन्न – भिन्न सहयोग कार्यालय के संचालोकों का न जाने क्या हो रहा है ? यह एक यक्ष्य प्रश्न बना हुआ था और आज भी बना हुआ है।