
चांडिल बांध विस्थापितों का अधीक्षण अभियंता कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन

संवाददाता: कल्याण पात्र
चांडिल : बांध के विस्थापितों ने मंगलवार को विस्थापित मुक्ति वाहिनी के नेतृत्व में अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए सरकार के पर्यटन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चांडिल जलाशय क्षेत्र में नौकायान संचालन का अधिकार विस्थापितों को उनके पुनर्वास अधिकार के तहत लम्बे संघर्ष के बाद मिला था, लेकिन अब यह अधिकार एक निजी एजेंसी को सौंपकर विस्थापितों के हक का हनन किया जा रहा है। विरोध कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति 2012 में यह प्रावधान है कि जलाशय क्षेत्र में पर्यटन एवं मत्स्य व्यवसाय की जिम्मेदारी विस्थापितों को दी जाएगी, जिससे उनके आर्थिक पुनर्वास को सुनिश्चित किया जा सके। इसके बावजूद पर्यटन विभाग ने गिरिडीह की एक निजी एजेंसी को नौकायान संचालन का अधिकार देकर विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी की है। प्रदर्शन के दौरान सौंपे गए 11 सूत्री मांगपत्र में प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं:
पर्यटन विभाग द्वारा निकाले गए नौकायान निविदा को तत्काल रद्द किया जाए और संबंधित योजनाओं को विस्थापित समिति के माध्यम से संचालित किया जाए। चांडिल जलाशय में जिला मत्स्य पदाधिकारी की मनमानी पर तुरंत रोक लगाई जाए। लंबित पुनर्वास दायित्वों को शीघ्र पूरा किया जाए। डिमना में नए बस स्टैंड परिसर में दुकानें बनाकर विस्थापितों को दी जाएं।
विस्थापितों के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाए। सभी पुनर्वास स्थलों का सीमांकन कर भूखंडों का राजस्व अभिलेख में मालिकाना हक दर्ज किया जाए। बांध के पीछे के इलाकों में लिफ्ट इरीगेशन और डीप बोरिंग की व्यवस्था की जाए। पालना जलाशय योजना को शीघ्र पूरा किया जाए। योग्य विस्थापितों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता के साथ नियुक्त किया जाए। चांडिल जलाशय क्षेत्र के विभिन्न घाटों (दुलमी, लावा, पातकुम, बोराबिन्दा) का पर्यटन विकास किया जाए। सभी विकास पुस्तिकाओं में कृतज्ञता पैकेज शामिल किया जाए। प्रदर्शन के दौरान श्यामल मार्डी, नारायण गोप, आदित्य देव, पंचानन महतो, जोशना प्रमाणिक, कंचन देवी, ईश्वर चंद्र गोप, भजन गोप, रविंद्र सिंह सरदार सहित सैकड़ों विस्थापितों की उपस्थिति दर्ज की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।
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