
दुमका : कोयले के डंपिंग से नदी के पानी का रंग हुआ काला, सुध लेने वाले बेखबर…
••• जल, जंगल और जमीन के बात करने वाले अब कहां गये ? क्यों मौनी बाबा बने बैठे हैं सारे ?

मौसम गुप्ता… ✍️
झारखंड राज्य का परिचय जल, जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ है। मंचों पर बड़े-बड़े बातें करने वाले मूखरों की कमी नहीं है । क्या उन्हें मालूम है कि, दुमका रेलवे स्टेशन के करीब बने कोयला का डंपिंग यार्ड किस तरह आस-पास के लोगों के ज़िन्दगी को ग्रहण लगा रहा है ? संज्ञान में लिया होता तो आज पत्रकारों को कलम का स्तेमाल करना न होता । आइए जानते हैं कि किस्सा क्या है ?
उपराजधानी दुमका रेलवे स्टेशन की बात करे तो आस-पास रहने वाले वासिंदे डरने लगे हैं । रेलवे स्टेशन परिसर में बना कोयले का डंपिंग यार्ड परेशानी का सबब बन गया है । स्टेशन पर बने कोयला डंपिग यार्ड को हटाने की मांग को लेकर लगातार वहां के ग्रामीण आवाज उठाते रहें पर किसी भी जिम्मेदार तंत्रों के कानों में जूं तक नहीं रेंग पाया ।
ग्रामीणों की बात सुनने वाला कोई नहीं है । पिढ़ीत लोगों ने केंद्र और राज्य सरकार पर जम कर अपनी भढ़ास निकाल रहे है । गौरतलब है कि, जब से रेलवे स्टेशन पर कोयला डंपिंग यार्ड बनाया गया है तभी से इसका विरोध किया जा रहा है। कोयले का डंपिंग के कारण यहां नदी का पानी भी काला हो गया है । ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ी परेशानी का कारण बन गया है । इस गंभीर मामले पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा रहस्यमई चुप्पी साधे रहना आम लोगों के गले से उतर नहीं रहा है।
ग्रामीण रवि शंकर मंडल ने कहा कि, अब तो लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ने लगें हैं। उन्होंने कहा, केंद्र की मोदी सरकार जहां स्वस्थ भारत का अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं वहीं केंद्र और राज्य सरकार की मनमानी से ग्रामीणों का जीवन खतरे में पड़ गया है। उन्होंने आगे कहा, केंद्र सरकार और राज्य सरकार उन लोगों को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर कर रहा है। लोगों की एक ही मांग है कि जल्द से जल्द दुमका रेलवे स्टेशन पर से कोयला डंपिंग यार्ड को हटा कर अन्यत्र शिफ्ट किया जाए, अन्यथा आने वाले समय में उग्र आंदोलन करने के लिए यहां के ग्रामीण बाध्य होंगे।
यहां बताते चलें कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर गोड्डा सांसद डॉ निशीकांत दूबे ने भी यहां के लोगों से 2024 के अंत तक कोयला रैक हटाने का वादा कर चुके हैं लेकिन उनके द्वारा किए गये वादे “ढाक के तीन पात” साबित हो रहा है ।
