
घाटशिला : 16 दिसंबर 1971 का दिन को कैसे कोई भारतीय भुला दें ?
दीपक नाग … ✍️

चौवन साल पहले आज ही की दिन पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था और बांग्ला देश को नया पहचान मिली थी।

इस दिन को “विजय दिवस” के रूप में पूर्व सैनिक
सेवा परिषद ने घाटशिला में हर्षोल्लास के साथ मनाया । कार्यक्रम का अगुवाई वायुसेना के पूर्व वारंट अफसर शौर्य चक्र मोहम्मद जावेद ने किया ।

उन्होंने कहा 16 दिसंबर के दिन को विजय दिवस के रूप में पूरे भारतवर्ष में हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है । जब कि आम लोग शायद ही इस दिन को याद करते होंगे ? इस लिए इस “विजय दिवस” को हमारे संगठन माना कर देश के आम लोगों को याद दिलाना चाहते हैं कि हमारे पूर्वज जो अपना सब कुछ न्योछावर अपने देश के लिए किया उनकी याद में जरूर श्रद्धांजलि अर्पित करें ।

इस कार्यक्रम में शहीद दिलीप बेसरा के माता फुलमनी बेसरा पिता सिंगरई बेसरा, वारंट ऑफिसर मो जावेद शौर्य चक्र, नायब सूबेदार रघुनाथ हांसदा सेना मेडल , फ्लाइंग ऑफ टेक लाल महतो (H), कैप्टन जगन्नाथ सिंह (H) कैप्टन धनों टुडू (H) सूबेदार मेजर लुगु बास्के ASO अनूप कुमार मिश्रा इंस्पेक्टर भांजो बारी, हवलदार सुरेश बास्के, मनोहर समद , नायब सूबेदार सुशीला मुर्मू , पेटी ऑफिसर गौरांग पातर ICC वर्कर यूनियन के बिरेन सिंहदेव, जयंत उपाध्याय, गुरुद्वारा कमिटी मौभंडार के गुरबचन सिंह, मुकुल महापात्र, विपिन कुमार सिंह, रणजीत दत्ता, ईश्वर छेत्री, दुर्गापूजा कमिटी इंदिरा मार्केट के अनुपम दास, खगेंद्र नाथ दस हैप्पी hour स्कूल की प्रिंसिपल रोजलिन पेटर, दरक्षा खान, मारवाड़ी महिला समिति घाटशिला की अध्यक्ष अनीता अग्रवाल NCC कैडेट SNSVM घाटशिला , घाटशिला कॉलेज के प्रोफेसर इंदल पासवान, AP सिंह, कामगार शाह मस्जिद के सेक्रेटरी मो शकील, कार्यक्रम का संचलन पूरे सैनिक प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया । प्रतिभागी को सर्टिफिकेट ऑफ पार्टिसिपेशन दिया गया और गरीबों के बीच कंबल का वितरण किया गया । छोटे छोटे स्कूल के बच्चों के हाथों में तिरंगा ऐसे लग रहा था जैसे बगीचे में फूल लहरा रहें हो ।
1971 के युद्ध के दौरान कैप्टन जगन्नाथ सिंह उस जंग में पूर्वी सीमा में तैनात थे, सीधे इस लड़ाई में शामिल नहीं हो पाए थे। पर युद्ध की मंजरों को इस तरह से वर्णन किया लोग मंत्र मुग्ध हो होकर सुन रहे थें। शौर्य चक्र मो जावेद ने परमवीर चक्र विजेता झारखंड के लाल अल्बर्ट इक्का के बलिदान से नई पीढ़ी राष्ट्र प्रेम सीखे और राष्ट्र सर्वोपरि के भाव से काम करने की आग्रह किया और कार्यक्रम के धन्यवाद संदेश देकर समापन किया ।
