
घाटशिला : झामुमो और भाजपा ने एक दुसरे को लिया आड़े हाथ। वाक्य यूद्ध हुआ भारी…
राजनीति की है क़िस्से यारी ? आज इसकी है 💪🏿 तो, कल उसकी है बारी…💪🏿

दीपक नाग…✍️
घाटशिला विधानसभा उप-चुनाव की तारीख जितनी नजदीक आती जा रही है, झामुमो और भाजपा के बीच वाक्य-युद्ध में तेजी आने लगी है।
बता दूं कि झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने भाजपा के सरायकेला विधायक सह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के संबंध में कुछ आलोचक की थी। जाहिर है, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के खिलाफ इस तरह के ब्यान आने से भाजपाइयों को बुरा लगा होगा और भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी प्रेस बुलाकर कुणाल षाड़ंगी पर कटाक्ष किया । मामला यहीं रुकी नहीं और गहराता चला गया।

परिणाम स्वरूप विगत 7 अक्टूबर के दिन घाटशिला एक होटल में भाजपा के जिला अध्यक्ष चण्डी चरण साव के नेतृत्व में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया गया। इस सम्मेलन में चण्डी चरण साव के अलावा मंच में भाजपा के नेतागण दिनेश साव, सौरभ चक्रवर्ती, हेमंत सिंहदेव, सत्ता तिवारी मौजूद थे । चंण्डी चरण साव ने प्रेस के सामने कुणाल षाड़ंगी को आड़े हाथों लिये थे। स्पष्ट है एक दल जब किसी अन्य दल के नेता आड़े हाथों लेता है तो राजनीतिक धर्म के तहत दुसरे दल वाले भी पहले दल वाले को उल्टा हाथों लेते हैं।

इस संदर्भ में आज झामुमो के स्थानीय एक प्रतिनिधिमंडल – जिसमें मुसाबनी झामुमो प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन, झारखंड श्रमिक संघ के अध्यक्ष काजल दां, घाटशिला के प्रखंड झामुमो अध्यक्ष दूर्गा चरण मुर्मू, घाटशिला प्रखंड झामुमो मीडिया प्रभारी सोमेन मिश्रा, हीरा सिंह और हूड़ींग सोरेन ने एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया।

प्रधान सोरेन ने कहा :-
भाजपा के जिला अध्यक्ष चण्डी चरण साव ने झामुमो के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी पर जो लांछन लगाया वह भ्रामक है । उन्होंने कहा, जिस गुरु जी शिबू सोरेन के साथ चलकर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन राजनीति मे वर्षों तक साथ चले उन्हें का इतना भी वक्त नहीं मिलता कि वह एक बार दिल्ली जाकर अपने राजनीतिक गुरु को देख आतें? प्रधान सोरेन ने, एक नई बात की आलोचना करते हुए कहा कि, झारखंड के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन और चंपाई सोरेन एक साथ लंबे समय तक झारखंड अलग राज्य के आंदोलन मे लड़े थे । जेल भी गये थे आंदोलन के दौरान। उन्होंने कहा, रामदास सोरेन का पार्थिव शरीर को उनके घोड़ाबांधा आवास मे लाया गया तो वहां भी एकबार श्रद्धांजलि देने नहीं गये और न परिवार के लोगों को सांत्वना दी है। हां, उनके पार्थिव शरीर को जब घाटशिला के मौभंडार में सार्वजनिक श्रद्धांजलि के लाया गया तब अपने पुत्र के साथ आएं थे। प्रधान सोरेन ने कहा, भाजपा के द्वारा किए गए पत्रकार सम्मेलन में कुणाल षाड़ंगी पर आदिवासी वेश-भूषा के बातों को लेकर निराधार आलोचना की गई है। श्री सोरेन ने कहा, भाजपा के उस मंच पर बैठे किसी को नहीं मालूम है क्या संथाली आदिवासी की पारंपरिक पहनावा – बढ़ावा क्या होती है ?

काजल दां ने कहा :-
भाजपा के जो लोग कुणाल षाड़ंगी के संबंध में आलोचना की है उन्हें किसी के संबंध में विस्तृत जानकारी के बगैर बोलना नहीं चाहिए था । जिनके ऊपर भाजपाइयों ने ऊंगली उठाने की कोशिश कर रहें हैं, वह एक पड़ा लिखा युवक है। विदेश मे “हावार्ड यूनिवर्सिटी” से पढ़ाई पुरी की । शिक्षित युवा है । कुणाल षाड़ंगी ने राजनीतिक द्वेष में आकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पर टिप्पणियां नहीं की होगी । दुख: के घड़ी में लोग राजनीतिक मतभेद को भुला कर पिढ़ित परिवार को मनोबल बढ़ाने के लिए जाते हैं । ऐसी विषम परिस्थितियों में किसी को राजनीति से प्रेरित बातें नहीं करनी चाहिए।

दूर्गा चरण मुर्मू ने कहा :-
भाजपा जिलाध्यक्ष चंडी चरण साव कहते हैं कि, कुणाल षाड़ंगी ने संथाली आदिवासी समाज के सम्मान को आहत किया है ! ऐसा है तो उनके पत्रकार सम्मेलन के मंच पर एक भी आदिवासी वक्ता क्यों मौजूद नहीं थे ? भाजपा के द्वारा चुनाव के दौरान गंदी राजनीतिक खेल खेलने का प्रयास में लगी है।

सोमेन मिश्रा ने कहा :-
इन्होंने ने भाजपा के जिला अध्यक्ष चण्डी चरण साव के सरासर ग़लत बताया, जिस पर श्री साव ने विगत दिनों को मीडिया कू सामने कहा कि, कुणाल अपने चाचा के बीमार रहते समय उनसे हस्पताल में मिलने तक गया है कि नहीं संदेह है?
सोमेन मिश्रा ने एस पर एक के बाद सभी तारिख का खुलासा किया जिस समय कुणाल अपने चाचा के साथ अन्य राज्य में समस्त चिकित्सा के दौरान साथ थे ।

हीरा सिंह ने कहा :-
भाजपा के जिला अध्यक्ष चण्डी चरण साव के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि भाजपा को पहले अपने गिरेबान झांक लेना चाहिए । आज उनके पार्टी में देहातों से लेकर दिल्ली तक पैदा होने के समय मुंह में सोने के चम्मच रखने वालों को पार्टी में जगह दे रहें है । उन्होंने आगे कहा, जिस परिवार वाद को लेकर हल्ला बोल करते रहते थे आज उनके पार्टी में देहातों से लेकर दिल्ली तक उस बीमारी से खुद ग्रसित है ।
बहरहाल, दोनों राजनीतिक दलों के बीच इस उप-चुनाव में आमने-सामने का मुकाबला है । जब तक मतदान का मुकाबला पुरा नही हो जाता है तब तक कुछ चीजों का तो टकराव होना ही है, बस हो रहा है “वाक्य – रूद्ध” ।
