
लोक अदालत से समय व धन की बचत : न्यायायुक्त
राष्ट्रीय लोक अदालत 14 मार्च को, डालसा की तैयारी तेज

Arjun Kumar Pramanik…..✍️
रांची। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के मार्गदर्शन में 14 मार्च, 2026 को व्यवहार न्यायालय, रांची में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाना सुनिश्चित हुआ है। लोक अदालत को सफल बनाने के लिए प्री-सीटिंग की बैठकें 13 मार्च तक लगातार आयोजित की जा रही हैं और डालसा रांची की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी क्रम में आज मीटिंग हॉल, रांची में न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 की अध्यक्षता में विभिन्न बैंकों एवं इंश्योरेंस कंपनियों के पदाधिकारियों व प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में डालसा सचिव राकेश रौशन, भूमि अधिग्रहण पदाधिकारी राजेश कुमार सिन्हा, सर्टिफिकेट पदाधिकारी अंजु कुमारी, नाप-तौल विभाग के निरीक्षक विजय बहादुर गुप्ता, सहायक श्रम आयुक्त वाल्टर कुजूर, क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) रांची विजय लक्ष्मी सिंह, चेयरमैन डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल रांची प्रमोद कुमार, डीटीओ अखिलेश कुमार, विद्युत विभाग के कार्यकारी अभियंता अजय कुमार, निदेशक संजय भगत सहित बैंक एवं इंश्योरेंस कंपनियों के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में न्यायायुक्त ने निर्देश दिया कि बैंक एवं इंश्योरेंस से संबंधित लंबित वादों की सूची तैयार कर नोटिस की तामिला सुनिश्चित की जाए अथवा दूरभाष के माध्यम से वादकारियों को सूचित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण हो सके और पीड़ितों को त्वरित लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि 14 मार्च को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का लक्ष्य अधिकतम मामलों का सुलह के माध्यम से समाधान करना है। इसके लिए संबंधित विभागों एवं संस्थानों को अपने-अपने कार्यालय क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर लगाकर आम जनता को जागरूक करना होगा। डालसा सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को लेकर पहले ही व्यवहार न्यायालय, रांची के न्यायिक पदाधिकारियों एवं पीएलवी के साथ बैठकें की जा चुकी हैं। सभी बैंकों एवं इंश्योरेंस कंपनियों के साथ समन्वय बैठकें जारी हैं। प्रखंडों एवं पंचायतों में कार्यरत पीएलवी को अपने-अपने क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर एवं पंपलेट के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन वादकारियों के सुलहनीय मामले न्यायालय में लंबित हैं, वे राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन अपने मामलों का निस्तारण करा सकते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक सुलहनीय मामले, दीवानी वाद, श्रम विवाद, वैवाहिक एवं पारिवारिक वाद, उत्पाद वाद, चेक बाउंस मामले, वन विभाग, बिजली विभाग, ट्रैफिक चालान, भूमि अधिग्रहण, मोटरयान, माप-तौल तथा विवाह से संबंधित मामलों को चिन्हित कर पक्षकारों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।

