
पटना : “भारत के ‘जेन- जी’ राहुल के आह्वान के उलट राष्ट्रवाद की ओर”…
संजय कुमार विनीत…✍️

(वरिष्ठ पत्रकार सह राजनितिक विश्लेषक)
भारत के ‘जेन-जी’ का झुकाव ,नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान के उलट राष्ट्रवाद की ओर दिख रहा है, कम से कम दिल्ली और हैदराबाद विश्वविद्यालयों में हुए हालिया छात्र संघ के चुनाव परिणामों में यह स्पष्ट दिख रहा है।

एबीवीपी ने पिछले एक साल में देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। इनमें हैदराबाद सेंट्रल विश्वविद्यालय पटना विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय और उत्तराखंड के कई विश्वविद्यालय शामिल हैं। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने वामपंथी गठबंधन और NSUI को हराकर बहुमत हासिल किया।चौंकाने वाली बात यह रही कि एनएसयूआई को नोटा से भी कम वोट मिले, जबकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है। जो कांग्रेस की करारी हार के साथ राहुल गांधी के लिए स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा सकता है।
नेपाल में बीते दिनों ‘जेन-जी’ क्रांति हुई। ‘जेन-जी’ आंदोलन ने नेपाल में तख्तापलट करवा दिया। केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई। अब उसी ‘जेन-जी’ की गूंज भारत में सुनाई दी तो देश में तहलका मच गया । दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत में ‘जेन-जी’ से ऐसी मांग की, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक बवाल मच गया है। राहुल गांधी के ‘नेपाल प्लान’ पर भाजपा हमलावर है। इसे लेकर राहुल गांधी भाजपा के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को ‘जेन-जी’ को संबोधित करते हुए एक पोस्ट कर कहा कि देश के ‘जेन-जी’ संविधान की रक्षा करेंगे।
झारखंड गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बगैर देर किये तीन प्वाइंट उठाकर राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि ‘जेन-जी’ नेहरु जी, इंदिरा जी, राजीव जी, सोनिया जी के बाद राहुल जी को क्यूं बर्दाश्त करेगा, ‘जेन-जी’ भ्रष्टाचार के खिलाफ है, आपको क्यूं नहीं भगाएगा? और ‘जेन-जी’ बंगलादेश में इस्लामिक राष्ट्र और नेपाल में हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है।वह भारत को हिंदू राष्ट्र क्यूं नहीं बनाएगा?
राहुल गांधी के ‘जेन-जी’ वाले बयान पर योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और ऐसे में वह लगातार युवाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने भी उनसे कहा कि अगर आपको कुछ गलत दिखता है तो कोर्ट जाइए।आप लोकतंत्र की बात करते हैं, लोकतंत्र को ही नहीं मानते हैं।
हैदराबाद सेंट्रल विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की जीत को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि पिछले छह सालों से विश्वविद्यालय में वामपंथी, दलित और एनएसयूआई का दबदबा रहा था। कर्नाटक में काग्रेस की सरकार है, और एनएसयूआई को नोटा से कम वोट का आना काग्रेस के लिए सच में चिंता का विषय है। यह हार उस वक्त हुई, जब राहुल गांधी ने ‘जेन-जी’ से आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा करने आगे आये। इधर, एबीवीपी ने कहा कि उनकी जीत छात्रों के राष्ट्रवाद के समर्थन और “विभाजनकारी राजनीति” को नकारने की निशानी है।
राहुल गांधी ने बार-बार यह दावा किया है कि भारत की ‘जेन जी’ पीढ़ी कांग्रेस की ओर झुक रही है। हालांकि एबीवीपी के लगातार बढ़ते उभार को एक व्यापक दक्षिणपंथी दावे के रूप में देखा जा रहा है। हालिया, दिल्ली विश्वविद्यालय और हैदराबाद सेंट्रल विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव परिणाम तो कम से कम ये जरूर स्पष्ट करता है कि ‘जेन जी’ राहुल गांधी के आह्वान के उलट राष्ट्रवाद की ओर झुकी वर्तमान सरकार के कार्यों से संतुष्ट है।
