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ग्रामीण हस्तशिल्प एवं खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री में दिखी स्थानीय प्रतिभा……

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Arjun Kumar….✍️

नामकुम(रांची) । ग्रामीण महिलाओं, स्थानीय कारीगरों एवं स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उषा मार्टिन फाउंडेशन की ओर से ग्रामीण हस्तशिल्प एवं खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में ग्रामीण महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री, बांस एवं लकड़ी के उत्पाद, पारंपरिक कलाकृतियां, सोहराय पेंटिंग तथा मड़ुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और ग्रामीण महिलाओं, कारीगरों एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से बातचीत कर उनके उत्पादों की जानकारी ली। इस अवसर पर एच आर हेड एन. एन. झा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हुनर और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है कि इन प्रतिभाओं को उचित मंच, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार से जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। मेनटेंनस हेड आर. के. सिंह ने कहा कि ग्रामीण उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर प्रस्तुतीकरण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान मिल सकती है और उनकी मांग भी बढ़ सकती है। डीजीएम जाय घटक ने कहा कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल पर आधारित उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को नियमित प्रशिक्षण तथा बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। डीजीएम पल्लव नटराजन ने कहा कि पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को आधुनिक डिजाइन और तकनीक से जोड़कर उत्पादों को और अधिक आकर्षक एवं बाजार के अनुरूप बनाया जा सकता है। इससे स्थानीय कारीगरों को अपने हुनर की बेहतर कीमत मिल सकेगी। वरीय डीजीएम अरूप दत्ता ने कहा कि ग्रामीण उत्पादों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने के लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को डिजिटल माध्यमों के जरिए बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। प्रदर्शनी के दौरान ग्रामीण महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए और उत्पादों के विपणन, प्रशिक्षण, पैकेजिंग एवं बाजार उपलब्ध कराने से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने ग्रामीण उत्पादों की सराहना करते हुए कारीगरों एवं समूहों को अपने हुनर को और विकसित करने तथा नए उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उषा मार्टिन फाउंडेशन की यह पहल ग्रामीण हुनर को पहचान दिलाने, महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा स्थानीय कला, संस्कृति और खाद्य उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।इस अवसर पर विभिन्न स्वयं सहायता समूह के

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