
निजी मुचलके की शर्त पर आदित्यपुर थाना में बवाल, भाजपा-विहिप के विरोध के बाद पुलिस को बदलना पड़ा प्रारूप


रिर्पोटर – जगबंधु महतो
थाना परिसर में पत्रकारों की कवरेज पर रोक से बढ़ा विवाद, प्रेस की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
आदित्यपुर: हिमांशु सिंह हत्याकांड के विरोध में हिरासत में लिए गए लोगों से भरवाए जा रहे निजी मुचलके की एक शर्त को लेकर शनिवार को आदित्यपुर थाना परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मुचलके में कथित तौर पर यह उल्लेख किया गया था कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में हत्याकांड से जुड़े किसी भी जुलूस, धरना या प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा। इस शर्त का भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं ने तीखा विरोध किया और थाना परिसर में ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हिरासत में लिए गए आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना था कि बेगुनाहों के समर्थन में आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और निजी मुचलके में इस तरह की शर्त जोड़ना नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जबरन ऐसी शर्तें लिखवाकर लोगों को भविष्य के आंदोलनों से दूर रखने की कोशिश कर रही है।
भाजपा और विहिप कार्यकर्ताओं के तीव्र विरोध के बाद पुलिस प्रशासन को अपना रुख बदलना पड़ा। विरोध बढ़ने पर आदित्यपुर थाना पुलिस ने निजी मुचलके के प्रारूप में संशोधन किया, जिसके बाद मामला कुछ शांत हुआ।
इसी दौरान थाना परिसर में एक और विवाद उस समय खड़ा हो गया, जब घटनाक्रम की कवरेज कर रहे पत्रकारों को सरायकेला के एसडीपीओ और आदित्यपुर थाना प्रभारी ने रिपोर्टिंग से रोक दिया। अधिकारियों का तर्क था कि हिरासत में लिए गए लोगों की कवरेज की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हालांकि, पत्रकारों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुबह जब बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था, तब विभिन्न मीडिया संस्थानों द्वारा उसकी कवरेज की गई थी। लेकिन जैसे ही पुलिस प्रशासन के विरोध की तस्वीरें और घटनाक्रम सामने आने लगे, मीडिया को रोक दिया गया। इस कार्रवाई से पत्रकारों में नाराजगी देखी गई और कई पत्रकारों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
थाना परिसर में मुचलके की शर्त और मीडिया कवरेज को लेकर उत्पन्न विवाद दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। राजनीतिक दलों और पत्रकारों की ओर से पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की जा रही है।

