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ग्रामीण आत्मनिर्भरता में वनसपंदा की भूमिका निर्णायक : अरूणा तिर्की

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✍️ Arjun Kumar Pramanik

रांची/नामकुम। झारखंड अपनी समृद्ध वन संपदा का उपयोग कर आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकता है। इसके लिए स्वदेशी अनाज, वनसंपदा और विचार परंपरा को अपनाने की जरूरत है। उक्त बातें अजम एम्बा की निदेशिका  अरुणा तिर्की ने कही। वह पारंपरिक आदिवासी व्यंजन पर आधारित रेस्टुरेंट चलाती है। वह  उषा मार्टिन के तत्वावधान में आयोजित महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता विषय पर बोल रही थी। अरुणा तिर्की ने कहा कि जब हमको अपनी संस्कृति पर गर्व होगा, तभी हम आदिवासी भोजन को पुनर्जीवित कर सकेंगे, उसको नयी पीढ़ी तक पहुंचा सकेंगे और आत्मनिर्भरता के साथ आय सृजन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जंगल में मिलने वाला महुआ, पुटकल, रूगड़ा, खुखरी, मडु़आ जैसे भोज्य पदार्थ को समग्रता में स्वीकार करेंगे, तभी विकास भी होगा और संस्कृति भी बचेगी। केवल आय सृजन का लक्ष्य होगा, तब ऐसी चीजें धीरे-धीरे खत्म हो जायेगी, क्योंकि यह प्राकृतिक तरीके से ही उपजती है।
उषा मार्टिन के महाप्रबंधक डाॅ मयंक मुरारी ने कहा कि आहार का संबंध हमारे विचार और विकास से जुड़ा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती के साथ वनाधारित फल व फूलों को विकास का माध्यम बनाने से परंपरा का संरक्षण होगा और आय संवर्द्धन भी हो सकेगा। इस अवसर पर मशरूम ट्रेनर देवोतस पाड़िया ने मशरूम की खेती से विविध उत्पादों के निर्माण एवं उसकी बाजार उपलब्धता पर जानकारी दी। सूर्यशक्ति के अमित कुमार ने ड्रिप इरिगेशन एवं खेती के अन्य उपायों के बारे में बताया। इस अवसर पर महिलौंग के मुखिया संदीप तिर्की और टाटी पूर्वी के मुखिया कृष्णा पाहन ने भी विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर उषा र्मािर्टन फाॅउंडेशन के प्रिया बागची, मोनीत बूतकुमार, संगीता कुमारी, वरुण कुमार  उपस्थित थे।
सोहराई प्रशिक्षार्थियों को सर्टिफिकेट
उषा मार्टिन फाॅउंडेशन के तत्वावधान में सोहराई पेंटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 15 महिलाओं को सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। अब ये महिलाएं एक समूह बनाकर अपने उत्पादों को बेच रही है। तारा देवी, गीता देवी, नम्रता कुमारी, पुनम देवी, सोनाली मुंडा, पुनम देवी, मुन्नी मुंडा, अनिमा मुंडा, सेवंती कुमारी, सहरमनी देवी और सुमन देवी है।