
चिंतक डॉ मयंक मुरारी को मिला वर्ष 2025 का तुलसी सारस्वत सम्मान

✍️ Arjun kumar pramanik
रांची । राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान “तुलसी सारस्वत सम्मान 2025“ राँची के चिंतक और साहित्यकार डॉ मयंक मुरारी को मिला है। प्रदान करने का निर्णय तुलसी भवन कार्यकारिणी ने लिया है। यह जानकारी सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन तुलसी भवन के मानद महासचिव प्रसेनजित तिवारी ने दी।
डा मयंक मुरारी एक विचारक और सक्रिय लेखक हैं। वह व्यक्ति विकास के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर लिखते और काम करते हैं। वह भारत के ज्ञान प्रणाली के आंतरिक मूल्य और अंतर्निहित पहलू पर सोचते और चिंतन करते हैं। उन्होंने 30 सालों में अभी तक 18 किताबें और 700 से अधिक रिपोर्ट, भारतीय समाचार पत्र और पत्रिका में लिख चुके हैं। इन कार्यों के कारण उन्हें कई अवार्ड और पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।वह उषा मार्टिन में महाप्रबंधक सीएसआर और पीआर के रूप में काम कर रहे हैं। वे पिछले 15 सालों से गांवों के टिकाऊ विकास के प्रति संकल्पित है। वह हमारे समाज की सामूहिक जागरूकता के लिए विभिन्न मंचों से व्याख्यान भी देते है।
साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के फलस्वरूप इस वर्ष सम्मान में अंगवस्त्र, श्रीफल, सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह, पुष्प गुच्छ के साथ ₹51000 का चेक भी प्रदान किया जाएगा। उपरोक्त सम्मान पूर्व में मुंबई के वरिष्ठ आलोचक करुणाशंकर उपाध्याय, गुमला के समाजसेवी विकास भारती के अशोक भगत, चाकुलिया के समाजसेवी स्व पुरुषोत्तम दास झुनझुनवाला, हिन्दी व्याकरण के सुप्रसिद्ध विद्वान कमलेश कमल को प्रदान किया गया है। डाॅ मयंक मुरारी अपनी पुस्तकों और सार्वजनिक लेखन के माध्यम से मुख्यधारा के साहित्य और आलेखों में आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक चेतना को लाने के लिए कार्य करते है। उन्होंने समकालीन संवाद के भीतर भारतीय मूल्यों को रखने और उसके विस्तार का लक्ष्य रखा है। महान भारतीय सभ्यता की विकास यात्रा में आदिवासी जीवन और इसकी परंपराओं को सम्मानजनक रूप से एकीकृत करने पर काम करते है, जिसमें समावेश और विरासत संरक्षण पर जोर दिया गया है।

