
प्रखंड स्तरीय आक्रोश प्रदर्शन में भाजपा ने आदिवासी अधिकारों की अनदेखी पर सरकार को घेरा

✍️ Arjun Kumar Pramanik
रांची/नामकुम । भाजपा टाटीसिलवे मंडल अध्यक्ष राजेंद्र महतो के नेतृत्व में नामकुम प्रखंड मुख्यालय में आयोजित प्रखंड स्तरीय आक्रोश प्रदर्शन में आदिवासी समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने झारखंड सरकार द्वारा आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी, भूमि अधिग्रहण में मनमानी और फर्जी मुठभेड़ जैसे मामलों पर विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। इस कार्यक्रम में निम्नलिखित मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए ।
आदिवासी नेता सूर्या हांसदा का फर्जी एनकाउंटर
प्रदर्शनकारियों ने सूर्या हांसदा के संदिग्ध मुठभेड़ में की गई हत्या की सीबीआई जांच की मांग की। भाजपा का आरोप है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित रूप से की गई हत्या है। सूर्या हांसदा आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्षरत एक लोकप्रिय सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी आवाज़ दबाने की साजिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रिम्स 2 अस्पताल के लिए आदिवासी जमीन का अधिग्रहण
प्रदर्शन में यह भी मुद्दा उठाया गया कि नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 अस्पताल के निर्माण हेतु आदिवासी किसानों की उपजाऊ जमीन बिना उचित मुआवजा और प्रक्रिया के अधिग्रहित की जा रही है। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह कदम भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लंघन है। आदिवासी किसानों की आजीविका और भविष्य को खतरे में डालते हुए उनकी जमीन छीनने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने की मांग की।
आदिवासी अधिकारों की अनदेखी
प्रदर्शन में सरकार पर आदिवासी समुदाय की अनदेखी का आरोप लगाया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने माँग की कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि संरक्षण और आर्थिक विकास के लिए विशेष योजनाएँ बनाई जाएँ। साथ ही, जमीन की रक्षा, उचित मुआवजा और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएँ।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने “आदिवासी को न्याय दो”, “हेमंत सरकार जवाब दो” और “भूमि पर अधिकार हमारा है” जैसे नारे लगाकर अपनी मांगों को स्पष्ट किया। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी आवाज़ को दबाया नहीं जाएगा और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।

