
एक ही जमीन पर दो आदेश CO ने दावा आमंत्रित किया और नगर निगम ने सरकारी बता दी; लिखित आदेश कहाँ? जवाब किसी के पास नहीं

संवाददाता : जगबन्धु महतो
आदित्यपुर : सरायकेला-खरसावां जिले में प्रशासनिक कार्यशैली पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड-17 स्थित भारत सरकार के आकाशवाणी केंद्र के सामने की जमीन पर विवाद उस समय गर्मा गया जब दावा करने वाले राजीव कुमार द्वारा लगाई गई बाड़ को शुक्रवार देर रात पुलिस ने तोड़ दिया। राजीव का कहना है कि 5 जुलाई 1982 को उनके पिता ने डीड संख्या 2773/2794 के तहत 15.5 डिसमिल जमीन खरीदी थी, जिसमें से 7 डिसमिल पर आकाशवाणी ने गलत तरीके से बाउंड्री बना ली और शेष 8.5 डिसमिल पर अवैध रूप से पार्क बनाया गया, जबकि न मुआवजा दिया गया और न कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। गौर करने वाली बात यह है कि इसी जमीन को लेकर 14 मई 2025 को गम्हरिया अंचल अधिकारी ने नोटिस जारी कर 21 मई तक दावेदारी और आपत्तियाँ मांगी थीं, पर किसी ने दावा नहीं किया। इसके विपरीत 22 नवंबर 2025 को नगर निगम ने नोटिस जारी कर उक्त जमीन को सरकारी बताते हुए राजीव को 29 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे उपस्थित होने का आदेश दिया। नगर निगम प्रशासक का कहना है कि कार्रवाई उपायुक्त के व्हाट्सएप निर्देश पर की गई है, लेकिन कोई लिखित आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया। मामले में पुलिस की भूमिका भी उलझी दिखी — थाना प्रभारी ने शिकायत की जानकारी होने से इंकार किया और कॉल कट गया, जबकि पुलिस अधीक्षक ने दस्तावेज देखने के बाद थाना को स्पष्ट निर्देश दिया कि बिना जांच किसी भी दावे में हस्तक्षेप न किया जाए। स्थानीय लोग जमीन को अयाडा की बताते हैं और कहते हैं कि पिछले 15 साल से पार्क का रखरखाव नहीं होने के कारण वह खंडहर में बदल चुका है। अब पूरा मामला इस सवाल पर आकर अटक गया है कि जमीन पर असल अधिकार किसका है — राजस्व विभाग का, नगर निगम का या खरीददार का, और क्यों जिले की दो प्रशासनिक इकाइयों के आदेश एक-दूसरे के विपरीत नजर आ रहे हैं। यह विवाद एक बार फिर जिले में फाइलों में दबे पड़े ऐसे मामलों और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।

