
मयंक मुरारी को वर्ष 2026 का आचार्य विद्यानिवास मिश्र स्मृति सम्मान

Arjun Kumar Pramanik……✍️
रांची । चिंतक एवं लेखक डॉ. मयंक मुरारी को विद्यानिवास मिश्र के जन्मशती वर्ष के अवसर पर बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी काशी में विद्याश्री न्यास द्वारा वर्ष 2026 का आचार्य विद्यानिवास मिश्र स्मृति सम्मान उनकी पुस्तक “जंबूद्वीपे भरतखंडे” (प्रभात प्रकाशन) के लिए प्रदान किया गया। यह सम्मान असम के राज्यपाल लक्ष्मण, काशी विद्यापीठ के कुलपति आनंद कुमार त्यागी, करपात्री महाराज धर्म संघ पीठ के अध्यक्ष जगजीतन पांडेय तथा विद्याश्री न्यास के सचिव डॉ दयानिधि मिश्र के कर-कमलों से प्रदान किया गया। समारोह के दौरान डॉ. मुरारी ने विभिन्न अकादमिक सत्रों में भाग लेते हुए “देश और काल में लोक” विषय पर अपने विचार रखे और कहा कि वैचारिक ज्ञान-गंगा के इस अनुष्ठान ने चेतना को नया धरातल दिया। उनसे पूर्व इस सम्मान से देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी कृष्ण बिहारी मिश्र, अमृतलाल बेगड़ा, नंदकिशोर आचार्य, श्यामसुंदर दूबे, राजेंद्ररंजन चतुर्वेदी, उषा किरण खान और श्रीराम परिहार सम्मानित हो चुके हैं। तीन दशकों से सक्रिय लेखन और चिंतन में संलग्न डॉ. मुरारी भारतीय जीवन-संस्कृति, इतिहास, परंपरा और लोकजीवन के वैज्ञानिक विश्लेषण पर केंद्रित 20 से अधिक पुस्तकों और 700 से अधिक लेखों/रिपोर्टों के लेखक हैं; वे उषा मार्टिन में महाप्रबंधक (सीएसआर व पीआर) के रूप में कार्यरत रहते हुए पिछले 15 वर्षों से ग्रामीण टिकाऊ विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और विभिन्न मंचों से व्याख्यान देते हैं। सार्वजनिक जीवन में लेखन व ग्रामीण विकास के लिए उन्हें झारखंड विधानसभा सृजनात्मक लेखन सम्मान, शब्दशिल्प सम्मान (जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल), तुलसी सारस्वत सम्मान, साहित्योदय गौरव, सिद्धनाथ कुमार साहित्य स्मृति, साहित्य अकादमी रामदयाल मुंडा कथेतर, जयशंकर प्रसाद, जुसारू मीडिया सृजनात्मक लेखन, प्रभात खबर झारखंड गौरव, विद्यावाचस्पति, द टाइम्स ऑफ इंडिया का एक्सीलेंस इन विलेज डेवलपमेंट, वनबंधु परिषद का क्वालिटी एजुकेशन फॉर ट्राइबल चिल्ड्रेन और झारखंड रत्न सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
Related posts:

