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श्रावणी मेला  के दौरान बासुकीनाथधाम पहुंच रहे श्रद्धालु

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रिपोर्टर: मौसम गुप्ता

दुमका : राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव 2025 के दौरान बासुकीनाथधाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए एक नई और सराहनीय पहल ने विशेष ध्यान खींचा है — ‘दीदी का ढाबा’, जो न केवल स्वादिष्ट और हाइजेनिक भोजन परोस रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का माध्यम भी बन रहा है।
ढाबे के बाहर लगी कतारें, महिलाएं सादी साड़ी में भोजन परोसती हुईं, श्रद्धालु भोजन करते हुए संतुष्ट नजर आते हैं। बताते हैं कि  “हमें यहां बहुत ही कम कीमत पर स्वच्छ और स्वादिष्ट भोजन मिल रहा है। सबसे अच्छी बात है कि यह सब बहनों द्वारा परोसा जा रहा है – भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता है।”
यह ढाबा स्थानीय महिला स्वंय सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसमें महिलाएं पूरी आत्मीयता से श्रृद्धालुओं का स्वागत कर रही हैं। ढाबे में शुद्धता और पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां भोजन कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ मूलभूत सुविधाएं – भोजन, आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा – एक ही स्थान पर सुलभ हों। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी, स्वास्थ्य जांच कैंप, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई पर विशेष ध्यान।
‘दीदी का ढाबा’ न केवल श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहा है। यह पहल भविष्य में अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

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