
घाटशिला : भाजपा मे टिकट किसका ? क्या सोच से परे प्रत्याशी होंगे ?
दीपक नाग… ✍️

जब से झारखंड के चुनावी कुरुक्षेत्र में एनडीए और यूपीए/इंडिया ने गठबंधन का फार्मूला अपनाया, तब से देखा गया है कि, घाटशिला विधानसभा चुनाव में झामुमो और भाजपा के बीच सीधी टक्कर हुई है । स्पष्ट है कि, एक की जीत तो दुसरे की हार होगी। चुनावी समीकरण इतना सरल हो तो पार्टी टिकट पाने की दावेदारी बड़ जाती है और अपने भाग्य को आजमाने की चाहत रखतें हैं। यहीं जाकर भाजपा में “एक है अनार और सौ है बीमार” वाले कथन सार्थक दिखने लगती है। हां, झामुमो इस मुहावरे से अब तक बाहर नजर नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि, भाजपा के लिए घाटशिला विधानसभा उप-चुनाव में पहले से ही तीन प्रत्याशी मौजूद हैं । लखन मार्डी, डाक्टर सुनिता देवदूत सोरेन और बाबुलाल सोरेन।तीनों ही जमीन से जुड़े हुए हैं और लगातार जन संपर्क में लगे हुए हैं। तीनों टिकट पाने के दावेदार हैं और तीनों को विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुभूति भी है । जाहिर है इन्हें भी पार्टी से टिकट मिलने की आशाएं होंगी। इन तीनों में से किसी एक को पार्टी टिकट मिलने की बात लोगों के जुबान से सुनी भी जा रही है। इधर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के माध्यम से एक नया चेहरा चर्चा का विषय बना हुआ। अगर यह बातें सच हुई तो, अब तीन दावेदारों की जगह संख्या बढ़ कर चार होता नजर आ रहा है। अर्थात “एक है अनार और सौ है बीमार” का मुहावरा सार्थक होता नजर आ रही है। दबे शब्दों में चर्चा है कि, चौथे दावेदार के रुप में घाटशिला विधानसभा के भाजपा का प्रत्याशी डाक्टर प्रदीप कुमार बालमुचू हो सकते है ? यद्यपि, अभी तक भाजपा का टिकट डाक्टर बालमुचू को मिलने की बात अधिकारिक रुप से पुष्टि नहीं हुई है।
डाक्टर बालमुचू कांग्रेसी के टिकट से लगातार तीन बार 1995 से लेकर 2005 तक घाटशिला विधानसभा चुनाव में हेट्रिक करने वाले शख्स है । बता दूं कि, डाक्टर बालमुचू अविभाजित बिहार के मंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं ।
घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में दिवंगत विधायक रामदास सोरेन और डाक्टर प्रदीप कुमार बालमुचू के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा हमेशा जबरदस्त रहा। इन दोनों नेताओं का राजनीतिक पकड़ सहर से लेकर गांव तक मजबूत रहा। यही वजह है कि, इन दोनों नेताओं को राजनीतिक मैदान में एक दुसरे के बड़े प्रतिद्वंद्वी के देखा गया। समय के अंतराल में 2019 मे झारखंड में कांग्रेस और झामुमो के बीच चुनावी गठबंधन तय हुआ। गठबंधन धर्म के तहत कांग्रेस को घाटशिला विधानसभा का सीट को छोड़नी पड़ी। पर डाक्टर बालमुचू हथियार डालने से बेहतर चुनाव लड़ना समझे। 2019 के विधानसभा चुनाव होने के कुछ ही सप्ताह पहले डाक्टर बालमुचू ने आजसू के टिकट से चुनावी कुरुक्षेत्र मे कुद पड़े। क्षेत्र में आजसू का जनाधार चुनाव जीतने के लायक नहीं था। चुंकि, आजसू एनडीए समर्थित होने के कारण डाक्टर बालमुचू का एक समय मजबूत वोट बैंक रहा मुस्लिम और ईसाई समुदायों का समर्थन नहीं मिला। इन परिस्थितियों मे भी डाक्टर बालमुचू आजसू पार्टी के विगत चुनाव में मिले मतों की तुलना मे अधिक मत हासिल कर तीसरे पायदान पर खुद को खड़ा किया।
यह बातें इसलिए कहना जरूरी है कि, राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। कौन कब पार्टी बदल कर किस पार्टी में चले जाएं या कौन सी राजनीतिक पार्टी किस नेता को कब अपने दल में शामिल कर लें यह कहना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।
भारतीय जनता पार्टी का चुनावी रणनीति पिछले कुछ वर्षों में औरों से कुछ हट कर रहा है। असम और मध्य प्रदेश के चुनाव में औसतन नये चेहरों को आगे बढ़ाया और बजी भी मारी। इसलिए घाटशिला विधानसभा के उप-चुनाव मे डाक्टर बालमुचू को पार्टी टिकट देने की बात को पुरी तरह खारीज भी नहीं की जा सकती है। अगर यह फार्मूला अपनाया गया तो, भाजपा घाटशिला विधानसभा के उप-चुनाव के जरिए एक तीर से दो शिकार करने की रणनीति की तैयारी कर सकते हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को पार्टी टिकट देकर सरायकेला विधानसभा का सीट ही सिर्फ हासिल नहीं किया, झामुमो का गढ़ सरायकेला में झामुमो को कमजोर भी किया है। संभवतः घाटशिला विधानसभा के लिए भी ऐसी ही कोई फार्मूले को चुनावी मैदान में आजमा सकती है भाजपा !
बहरहाल, मुख्य चुनाव आयोग ने घाटशिला विधानसभा उप-चुनाव का 11 नवंबर और मतगणना 14 नवंबर का तारीख जारी कर दी है। ऐसे में भाजपा के हाई कमान ज़्यादा समय तक अपने फार्मूले को दाबा कर नहीं रख पाएंगे । जब तक कार्ड ओपन नहीं होता तब-तक वस्तु स्थिति समय के गर्भ में है।
