
सरकारी अनदेखी से टूटी उम्मीदें बूढ़ीबेड़ा के ग्रामीणों ने खुद बनाया अपना रास्ता

Arjun Kumar……✍️
अनगड़ा(राँची) । प्रखंड के चतरा पंचायत अंतर्गत आदिवासी बहुल बूढ़ीबेड़ा गांव में बदहाल सड़क ने ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किलों में डाल दिया है। वर्षों से जर्जर पड़े इस रास्ते की मरम्मत नहीं होने पर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही पहल करते हुए सामूहिक श्रमदान और चंदा जुटाकर सड़क की मरम्मत कर डाली।
ग्रामीणों ने ग्रामसभा आयोजित कर यह निर्णय लिया कि यदि सरकार के भरोसे बैठे रहे तो सड़क कभी नहीं बनेगी और इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा। इसके बाद गांव के लोगों ने आपस में पैसा इकट्ठा किया और जेसीबी व ट्रैक्टर की मदद से मिट्टी डालकर सड़क की मरम्मत की। गांव की मुख्य समस्या यह है कि सड़क बनने के बाद से आज तक उसकी कभी मरम्मत नहीं हुई। रास्ता पूरी तरह उजड़ चुका है और जगह-जगह बड़े-बड़े पत्थर के टुकड़े पड़े हुए हैं, जिससे आवाजाही बेहद कठिन हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खिजरी विधायक सहित पूर्व के जनप्रतिनिधियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। ठोस पहल आज तक नहीं की गई, जिससे लोगों में निराशा और हताशा का माहौल है।
महिलाओं ने बताया कि खराब सड़क के कारण कई बार गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कत हुई, यहां तक कि कुछ मामलों में रास्ते में ही डिलीवरी हो गई। एम्बुलेंस गांव तक आने से कतराती है, जिससे मरीजों और स्कूली बच्चों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है। बूढ़ीबेड़ा ग्राम प्रधान मोहन उरांव ने बताया “हम लोग वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर गांव वालों ने खुद ही चंदा कर सड़क की मरम्मत की। अगर सरकार ध्यान नहीं देगी तो आगे भी हम अपने स्तर से ही काम करेंगे, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।” चतरा ग्राम प्रधान क्रिस्टो कुजुर ने बताया “यह सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और कई बार प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी गई है। गांव आदिवासी बहुल है और यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सरकार को अविलंब स्थायी सड़क निर्माण की दिशा में पहल करनी चाहिए।” ग्रामीणों का कहना है कि अब वे समझ नहीं पा रहे हैं कि अपनी समस्या लेकर कहां जाएं। सरकारी उदासीनता के बीच गांव की यह तस्वीर विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अनगड़ा प्रखंड के चतरा पंचायत अंतर्गत बूढ़ीबेड़ा गांव… जहां विकास के दावे तो बहुत हुए, लेकिन हकीकत आज भी बदहाल सड़क के रूप में सामने है। सालों से जर्जर पड़े इस रास्ते ने ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है।

