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सरायकेला : पीएचडी कार्यालय में जल सहिया से ऑडिट के नाम पर पैसे की उगाई…

• किसकी है जिम्मेदारी ? कब रुकेगी भ्रष्टाचार और बेईमानी का यह खेल ?

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रिपोर्टर – जगबंधु महतो

सरायकेला जिले के राजनगर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों की जल सहिया ने पीएचडी कार्यालय में चल रहे ऑडिट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 256 जल सहिया को ऑडिट के लिए सरायकेला बुलाया गया था, लेकिन मौके पर उपस्थित जल सहिया का कहना है कि ऑडिट करने वाले ऑडिटर द्वारा उनसे अवैध रूप से पैसों का मांग किया जा रहा हैं।

इस संबंध में केंदमूड़ी पंचायत की एक जल सहिया ने बताया कि जिसका जीरो बैलेंस है उससे भी 100 रुपये मांगा जा रहा है । और जिनका बड़ेफ (कूड़ादान) और शॉर्ट पीट बना है उनसे 1500 से लेकर 2500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जल सहिया द्वारा पूछे जाने पर की पैसा क्यों दें, तो ऑडिटर का कहना है कि तुम्हारा आईडी से कम हुआ। पैसे नहीं देने वालों का ऑडिट नहीं होगा कह कर भयभीत करा या जा रहा है । कहते हैं जहां शिकायत करनी है कर सकती हो, पैसे दिए बिना ऑडिट नहीं होगा। जल सहिया ने यह भी बताया कि, सरकारी योजनाओं में अधिकतर काम संवेदक करवाते हैं और उन्हें सिर्फ रजिस्टर पर हस्ताक्षर करवाए जाते हैं कोई बिल या वाउचर नहीं दिया जाता। ऐसे में ऑडिट के लिए बिल-वाउचर की मांग करना तर्कहीन और अन्यायपूर्ण है। बीजाडीह पंचायत की जल सहिया अनिता प्रधान ने बताया कि मैंने जब पैसे देने से मना किया तो कहा गया कि जीरो बैलेंस वालों का ऑडिट नहीं होगा। अब सवाल उठता है कि अगर ऑडिट नहीं होना था तो हमें यहां बुलाया ही क्यों गया? हमारे आने-जाने के खर्च का जिम्मेदार कौन होगा? जल सहिया ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने और इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। वहीं अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पीएचडी विभाग इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।

बहरहाल, जिला प्रशासन, अनुमंडल प्रशासन और प्रखंड प्रशासन के प्रतिष्ठा पर यह एक बड़ी चुनौती है कि, बेखौफ होकर आडिट करने वाले रिश्वत लेने का दुकान खोल रखा है । जिम्मेदार तंत्र अगर इसे रोकने मे असफल साबित होता है तो, “चीराग तले अंधेरा” का मुहावरा सटिक साबित हो सकता है।

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