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यह बजट विकास का नहीं, बल्कि डर, निराशा और दिशाहीनता का बजट है: कुणाल षाड़ंगी

संवाददाता: विश्वकर्मा सिंह
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार के आम बजट को लेकर कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग के साथ खुला अन्याय है.

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श्री षाड़ंगी ने कहा कि देश आज गंभीर बेरोज़गारी संकट से जूझ रहा है, किसान बदहाली में हैं, लेकिन वित्त मंत्री ने अपने पूरे बजट भाषण में किसानों का नाम तक लेना ज़रूरी नहीं समझा. यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर को उम्मीद थी कि टैक्स इंसेंटिव के ज़रिए निवेश और रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन सरकार इस मोर्चे पर भी पूरी तरह विफल रही. एसटीटी बढ़ाकर निवेशकों को हतोत्साहित किया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि सेन्सेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली.

बाज़ार की अपेक्षा थी कि सरकार विकास को गति देने के लिए आक्रामक खर्च करेगी, लेकिन अत्यधिक सतर्कता के कारण शॉर्ट टर्म निवेशकों का भरोसा टूट गया. वहीं आम जनता को आयकर में कोई वास्तविक राहत नहीं दी गई, उल्टा छोटी-सी चूक पर 100 प्रतिशत पेनल्टी का डर दिखाया गया है.

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि डर, निराशा और दिशाहीनता का बजट है. जब किसान उपेक्षित हों, युवा बेरोज़गार हों और निवेशक निराश हों, तो साफ़ है कि यह सरकार देश की अर्थव्यवस्था को नहीं, सिर्फ़ आंकड़ों को संभालने में लगी है.

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