
मशरूम की खेती से महिलाएँ बन रहीं आत्मनिर्भर: डॉ. मयंक मुरारी

Arjun Kumar Pramanik…..✍️
नामकुम(रांची)। महिला सशक्तिकरण से समाज आत्मनिर्भर बनता है। इसी उद्देश्य के साथ उषा मार्टिन फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए मशरूम की खेती को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाया गया है। फाउंडेशन द्वारा गांवों के 60 महिला समूहों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया, जिसके माध्यम से महिलाओं ने अब तक ढाई लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए उषा मार्टिन फाउंडेशन द्वारा मशरूम उत्पादन, टेलरिंग, फैशन डिजाइनिंग एवं सोहराई कला से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं को ऑयस्टर मशरूम उत्पादन से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, ताकि वे कम लागत में स्वरोजगार कर सकें।
उषा मार्टिन फाउंडेशन के सचिव डॉ. मयंक मुरारी ने बताया कि वर्ष 2025 में 120 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता विकास से जोड़ा गया है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऑयस्टर मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को वैज्ञानिक पद्धति से खेती की संपूर्ण जानकारी देना था। प्रशिक्षण के बाद कई महिलाएँ अपने घरों में ही मशरूम की खेती शुरू करने के लिए प्रेरित हुई हैं। यह पहल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने, पोषण सुरक्षा बढ़ाने तथा स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में सफल सिद्ध हो रही है।
फाउंडेशन की प्रशिक्षक मोनीत बूतकुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को ऑयस्टर मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई, जिसमें पुआल एवं भूसा की तैयारी, उबाल प्रक्रिया, बीज (स्पॉन) डालना, बैग भरना, नमी व तापमान नियंत्रण, कटाई एवं भंडारण शामिल है। महिलाओं को बताया गया कि ऑयस्टर मशरूम की खेती कम जगह, कम समय और कम लागत में की जा सकती है। प्रशिक्षण के अंतर्गत महिलाओं द्वारा व्यावहारिक रूप से कुल 1159 किलोग्राम ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन किया गया। उत्पादित मशरूम को स्थानीय बाजार में विक्रय कर कुल 2,31,800 रुपये (दो लाख इकतीस हजार आठ सौ रुपये) की आय प्राप्त हुई, जिसे प्रतिभागी महिलाओं के बीच साझा किया गया।
इसी कड़ी में अनगड़ा प्रखंड के मनीराम महतो पिछले तीन वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने 48 हजार रुपये मूल्य का मशरूम बेचा है। वहीं 2024 में 180 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन कर 36 हजार रुपये की कमाई की थी। उनका कहना है कि मशरूम की खेती एटीएम मशीन की तरह है—जब चाहो, तब आय प्राप्त हो जाती है।
हेसल की लाखो देवी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025 में 40 किलोग्राम मशरूम बेचकर 8 हजार रुपये तथा 2024 में 51 किलोग्राम मशरूम बेचकर 10 हजार रुपये की आमदनी की। वहीं मासू गांव के मुल्लू महतो पिछले चार वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि मशरूम की खेती आमदनी का सबसे सरल और सहज माध्यम है। वर्ष 2024 में उन्होंने 18 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन किया था, जबकि 2023 में 125 किलोग्राम मशरूम बेचकर 25 हजार रुपये की कमाई की थी।
उषा मार्टिन फाउंडेशन द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के आजीविका एवं कौशल विकास आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाएँ और ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।

