
डा मयंक मुरारी की पुस्तक “शून्य की झील में प्रेम” का लोकार्पण

जीवन , प्रेम और अध्यात्म की त्रिवेणी है काव्य संग्रह
✍️ Arjun Kumar Pramanik
रांची। झारखंड के विचारक और लेखक मयंक मुरारी का काव्य संग्रह ‘शून्य की झील में प्रेम’ का लोकार्पण शब्दकार साहित्यिक समूह द्वारा प्रेस क्लब राँची में किया गया । मयंक मुरारी की यह तीसरी काव्य पुस्तक है । इस अवसर पर उन्होंने अपनी रचना के बारे में बताते हुए कहा काव्य मन से परे की अनुभूति है । प्रेम अगर कर्म से जुड़ जाए तो सृजन बन जाता है । प्रेम अगर भक्ति से जुड़ जाए तो मुक्ति का रास्ता बन जाता है ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि कुमार वृजेंद्र ने किया । उन्होंने काव्य संग्रह पर प्रकाश डालते हुए कहा, प्रेम साहित्य का सबसे पुरातन विषय है । नक्सलबाड़ी आन्दोलन के बाद प्रेम पर लिखना अस्पृश्य हो गया था । मयंक मुरारी को इसके लिए बहुत बधाई कि, इन्होंने प्रेम जैसे व्यापक विषय को चुना । इनकी कविताओं में कहीं अध्यात्म है तो कहीं नितांत निजीपन है ।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा ने कहा, इतिहास व्यक्ति के पद को नहीं, लेखन को याद रखता है । आने वाली पीढ़ी प्रेम पत्र के बारे में जान ही नहीं पाएगी । ऐसे समय में प्रेम कविताओं पर पुस्तक आना बहुत ही सुखद है ।
प्रमोद कुमार झा ने कहा कि, दुनिया-भर में जितनी भी रचनाएँ लिखी गई हैं, उसमें प्रेम के बारे में ही सर्वाधिक लिखी गई ।
शब्दकार की अध्यक्ष रश्मि शर्मा ने काव्य संग्रह के बारे में बात करते हुए कहा, ऐसे समय में जब हमारे चारों ओर प्रेम नहीं घृणा है, इस तरह की प्रेम कविताएँ लिखना बहुत आवश्यक है । शून्य की झील में प्रेम को पढ़ते हुए हम अपने प्रेम को याद कर सकते हैं और ईश्वर को भी ।
लेखिका अनामिका प्रिया ने कहा मयंक मुरारी की कविताएँ, प्रकृति के साथ होते हुए संवेदना के नए द्वार खोलती है । अकथ का स्वीकार और अकथ को कहे जाने की चुनौती इस संग्रह की कविताओं में दिखाई देती है
समीक्षक उर्वशी ने कहा, यह काव्य संग्रह जीवन प्रेम और अध्यात्म की त्रिवेणी है । इस संग्रह की कविताओं में व्यक्तिगत अनुभूति की आंतरिक सच्चाई नज़र आती है ।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सुरिंदर कौर नीलम की सरस्वती वंदना से हुई। स्वागत उद्बोधन शब्दकार की उपाध्यक्ष संगीता कुजारा टॉक ने किया । कार्यक्रम का संचालन राकेश रमण ने किया । रचना पाठ सोनल थेपड़ा ने किया । धन्यवाद ज्ञापन रीता गुप्ता ने किया ।
इस अवसर पर शब्दकार की सदस्य जयमाला, अंशुमिता शेखर, सुमिता सिन्हा, के साथ-साथ शहर के प्रबुद्ध साहित्यकार पंकज मित्र, प्रमोद कुमार झा, निरंजन श्रीवास्तव,नरेश बंका, रेणू झा , कुंदन चौधरी, प्रशांत गौरव, पंकज पुष्कर, मीरा सिंह, रेणु मिश्रा त्रिवेदी, रत्ना राय, किरण सिंह, शेफालिका सिन्हा, चंद्रिका ठाकुर आदि उपस्थित रहे ।

