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घासी समाज को अविलंब आदिवासी दर्जा प्रदान करो, अन्यथा होगा जनांदोलन

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Arjun Kumar Pramanik…..✍️

रांची । झारखंड में सम्पूर्ण घासी समाज ने अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा पुनः बहाल करने की प्रबल एवं न्यायोचित मांग उठाई है। इस संदर्भ में घासी समाज युवा कल्याण संगठन, झारखंड प्रदेश कमेटी ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांग पर शीघ्र एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो समाज सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा।

ऐतिहासिक अन्याय का प्रतिवेदन

संगठन के युवा अध्यक्ष टाइगर संदीप नायक एवं मुकेश कुमार नायक ने कहा कि घासी जाति ऐतिहासिक रूप से आदिवासी समाज का अभिन्न अंग रही है।

वर्ष 1931 से पूर्व घासी समुदाय अनुसूचित जनजाति की सूची में अंकित था।

स्वतंत्रता उपरांत 1950 की अधिसूचना में बिना किसी ठोस कारण के इस समाज को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में डाल दिया गया।

यह निर्णय घासी समाज के साथ घोर ऐतिहासिक अन्याय एवं असमानता है।

मुकेश नायक ने कहा कि घासी समाज झारखंड का मूलनिवासी समुदाय है, जिसकी अपनी विशिष्ट परंपराएँ, संस्कार एवं सांस्कृतिक धरोहर है। उनके रीति-रिवाज मुंडा, उरांव, संथाल एवं खड़िया जनजातियों की परंपराओं से पूर्णतः साम्य रखते हैं।

ब्रिटिश काल का साक्ष्य

संगठन ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1865 का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भी घासी समाज को आदिवासी मानते हुए अधिनियम की कई धाराओं से विमुक्त किया गया था। इसके बावजूद स्वतंत्र भारत में उन्हें SC की श्रेणी में रखना एक ऐतिहासिक भूल एवं न्याय से विचलन है।

अन्य राज्यों में आदिवासी मान्यता

अन्य राज्यों — राजस्थान, ओडिशा, छत्तीसगढ़ एवं असम में घासी समुदाय को आज भी आदिवासी का संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। किन्तु बिहार राज्य काल से झारखंड के घासी समाज की मांग अब तक उपेक्षित रही है।

पद्मश्री विभूतियों का समर्थन

इस आंदोलन को पद्मश्री मुकुंद नायक एवं पद्मश्री महावीर नायक का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भोक्ता समाज को पूर्व में अनुसूचित जाति से हटाकर पुनः अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान किया गया, उसी प्रकार घासी समाज को भी तत्काल आदिवासी सूची में सम्मिलित किया जाए।

आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस पहल नहीं की, तो समाज चरणबद्ध जनांदोलन की राह पर अग्रसर होगा और इसे राज्यव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी केंद्र एवं राज्य सरकार की होगी।

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