
आरआईटी थाना परिसर में होली जश्न पर उठे सवाल, ड्यूटी और अनुशासन को लेकर चर्चा तेज

रिपोर्टर – जगबंधु महतो
आदित्यपुर/आरआईटी: होली और रमजान को लेकर आयोजित शांति समिति की बैठक के बाद आरआईटी थाना परिसर में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों द्वारा अबीर-गुलाल लगाकर जश्न मनाने तथा देर रात तक फगुआ गीतों के आयोजन को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। थाना प्रभारी संजीव सिंह की मौजूदगी में हुए इस आयोजन की तस्वीरें और चर्चाएं जिलेभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पर्व-त्योहार के दौरान पुलिस बल की जिम्मेदारी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बढ़ जाती है। ऐसे समय में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। लोगों का तर्क है कि यदि थाना परिसर में रंग-गुलाल और जश्न का माहौल रहा, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ड्यूटी प्रभावित न हो।
जानकारों के अनुसार, झारखंड पुलिस के मैनुअल तथा सिविल सेवा (आचरण) नियमावली के तहत ड्यूटी के समय अनुशासन, निष्पक्षता और तत्परता बनाए रखना अनिवार्य है। नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि वेतनभोगी सरकारी कर्मचारी निर्धारित समय में पूर्ण रूप से सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे। बिना स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित रहना या कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकता है।
इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को इस आयोजन के लिए औपचारिक अवकाश स्वीकृत किया गया था, या फिर यह कार्यक्रम नियमित ड्यूटी के दौरान आयोजित हुआ?
सूत्रों के अनुसार जिले में 05 मार्च तक विभिन्न स्थानों पर, यहां तक कि उपायुक्त (डीसी) एवं पुलिस अधीक्षक (एसपी) के आवास पर भी होली मिलन समारोह आयोजित होने की परंपरा रही है। सामाजिक समरसता और सौहार्द के दृष्टिकोण से ऐसे आयोजन सकारात्मक माने जाते हैं, विशेषकर तब जब होली और रमजान जैसे पर्व एक साथ पड़ रहे हों।
हालांकि, विशेषज्ञों का मत है कि सार्वजनिक पद पर आसीन अधिकारियों को व्यक्तिगत उत्सव और आधिकारिक दायित्वों के बीच स्पष्ट संतुलन बनाए रखना चाहिए। यदि किसी भी समय कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है और पुलिस बल सीमित संख्या में उपलब्ध रहता है, तो त्वरित कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय नागरिकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए क्या दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं।
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