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कोयलांचल

  • घाटशिला अनुमंडल : अवैध लाटरी का गोरख धंधा, पुलिस के लिए बना चुनौती…
    घाटशिला अनुमंडल : अवैध लाटरी का गोरख धंधा, पुलिस के लिए बना चुनौती…

    घाटशिला अनुमंडल : अवैध लाटरी का गोरख धंधा, पुलिस के लिए बना चुनौती…

    संजय / दीपक …✍️

    पुरानी कहावत है, पुलिस डाल-डाल तो अपराधी पात-पात चलता है। यह और बात है कि, पुलिस मन बना लें तो पात-पात चलने वाले अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचने में देर नहीं लगता है । बाबजूद इसके अपराध का ग्राफ फ्लेक्सुएट तो होता है पर अब तक खत्म नहीं हो सका।यह इसलिए कह रहा हूं कि, घाटशिला अनुमंडल अनेक प्रखंडों और दर्जनों ताके समावेश से बना है।

    खबरों के अनुसार घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाना क्षेत्रो में अवैध लाटरी का गोरख धंधा चल रहा था। जुलाई के महीने में पूर्वी सिंहभूम जिले में नये वरिय पुलिस अधीक्षक डा. एहतराम वकारिब के योगदान करने के चंद दिनों के अंदर ही घाटशिला अनुमंडल के जिन थाना क्षेत्रों में अवैध लाटरी का धंधा चल रहा था वह बंद हो गया था। क्यों कि, नये वरिय पुलिस अधीक्षक डा. अहतेराम वकारिब अपने पदभार संभालते ही, पुरे जिले के पुलिस को हिदायत दी थी कि, किसी भी तरह का कोई अवैध और गैर-कानूनी धंधे बंद करना होगा। जिस थाना क्षेत्र में ऐसा पाया जाएगा उस थाने का प्रभारी जिम्मेदार माना जाएगा। और चौबीस घंटे के भीतर घाटशिला अनुमंडल मे होने वाली अवैध लाटरी का धंधा, अवैध बालू ढुलाई वगैरा थाना क्षेत्रों में चलना बंद हो गया। इस दौरान एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी किया गया था।

    लगता है, SSP साहब का कड़ा आदेश को घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाने वाले भूल गये है। दो महीने के अंदर फिर से अवैध लाटरी का धंधा घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाना क्षेत्रों में फिर से अपना फन उठाने लगा है।

    सवाल यह है कि, अगर वरिय अधिकारी के एक आदेश पर प्रभावित थाना प्रभारी लाटरी के अवैध कारोबार पर चौबिस घंटे के अंदर पुरी तरह अंकुश लगाने में सफल हुए थे तो फिर से यह खेला कैसे आरंभ हो पाया है ? क्या इस धंधे के रैकेट के बारे में पहले से ही जानकारी था प्रभावित थाने वालों को ? इन परिस्थितियों में कुछ प्रश्न तो वैसे पुलिस थाने का जवाबदेही तो बनता ही है।

    खबरों के अनुसार, कुछ दिनों से घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाना क्षेत्र में फिर से अवैध लाटरी संचालन करने वाले गिरोह सजग हो गया है और अपने पैडलर के माध्यम से चौक-चौराहों में धंधा करना आरंभ कर दिया है। चुंकि, इस गोरख धंधे का संपूर्ण टीम भरे ही शांत बैठ गया था दो महीने के लिए।

    क्या फिर से घाटशिला अनुमंडल के हर कोने तक यह जहर फैलने लगा है जंगल की आग के तरह। यह पुरे पुलिस महकमे के लिए एक सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है?

    कुछ महिने पहले चाईबासा के एक यूट्यूब पत्रकार सुजित ने इस पुरे गोरख धंधे का एक स्टिंग आपरेशन के माध्यम से काला चिट्ठा खोल कर रख दिया। जिसमें पुलिस की मिली भगत से अवैध लाटरी संचालन चाईबासा में चलने की बात पैडलर ने खुफिया कैमरे के समक्ष कहा। सुजित ने यह भी जिक्र किया कि, कथित रुप से सिकंदर और घसिया नाम के दो शख्स इस खेल का मास्टर माइंड है।

    विश्वसनिय पुत्रों के अनुसार, घाटशिला अनुमंडल मे जहां कहीं भी अवैध लाटरी टिकट का खेल चलाया जाता है वह चाईबासा से ही सप्लाई किया जाता है। और घाटशिला अनुमंडल मे दर्जनों सफेद कालर और माफिया प्रबृत्ति वाले लाटरी टिकट बिक्री का थोक विक्रेता है। जिनके अधीन अनगिनत बेरोजगार पैडलर का काम करता है।

    सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में अवैध लाटरी का खेल एक दिन मे दो बार खिलाया जाता है। सबेरे 8 बजे और दुसरी पाली दोपहर 1 बजे खेल का टिकट मैदान में पहुंच जाता है। टिकटों में तिथि और समय स्पष्ट उल्लेख रहता है। 

    खबरों के अनुसार, जिस किसी भी थाना क्षेत्रों में यह गोरख धंधे चलाया जाता है वहां कम से कम दो या तीन महाजन यानी क्षेत्र के मुख्य सप्लायर होता है। इसका किंग पिन शहर में कोई भी हो सकता है। चाहे वह माफिया प्रबृत्ति वाले या कोई नामचीन कपड़ा व्यापारी या तो फिर किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ इंसान भी हो सकता है! कोई भी हो सकता है। 

    खास बात यह है कि, इन दिनों कुछ किंग-पिंग अपने पैडलर के हाथों में टिकट का हार्ड कापी नहीं देकर साफ्ट कापी देखें हैं। पैडलर अपने एंड्रायड स्मार्टफोन फोन पर टिकटों का तस्वीरें खींच लेता है। हर पैडलर अलग-अलग एक सीरीज का साफ्ट कापी रखता है। यानी एंड्रायड स्मार्टफोन फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से लाटरी के टिकट खरीदारों तक उनके मन-पसंद नंबर का टिकट पहुंच जाता है। दुसरी और कुछ पैडलर लाटरी के हार्ड कापी लेकर अपने मंजिल तक पहुंच जाते हैं। कायदे से छापेमारी हो तो फोन और हार्ड कापी दोनों पुलिस को गंगा से गंगोत्री तक ले जा सकता है। क्यों कि, कानून ने उन्हें तफ्तीश करने का अधिकार दे रखा है। पत्रकार के लिए एक दायरा होता है। एक पत्रकार क्लू दे सकता है। शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि, उस क्लू के माध्यम से नियत के साथ आगे बड़े। 

    खास बात है, कि इस पुरे प्रकरण में पैडलर का एरिया फिक्स होता है। एक पैडलर दुसरे पैडलर के एरिया में आम तौर पर दखल अंदाजी आम तौर पर करना पसंद नहीं करता हैं। खबरों के अनुसार एक पैडलर प्रतिदिन दौ सौ से चार सौ रुपया कमिशन के तौर पर कमा लेता है। वहीं इस खेल के संचालक पुरे महीने में लाखों रुपया का मुनाफा उठाता है। सूत्रो के अनुसार, प्रत्येक सप्ताह लगभग 15 से 20 राख रुपया का इस क्षेत्र में अवैध लाटरी का खेल खेला जाता है। पैडलर मुख्य रुप से रेलवे स्टेशन, मैक्सी – टेक्सी स्टैंड, चौक-चौराहे और मुख्य सड़क के किनारे कहीं घात लगाकर बैठे रहते हैं। खबरों के अनुसार, क्षेत्र में इस तरह के कारोबारों को चलता देख कुछ सामाजिक लोग, डा. अहतेराम वकारिब SSP से मिलकर शिकायत करने का मन बना रहें हैं 

    बहरहाल, घाटशिला अनुमंडल मे पिछले कुछ वर्षों में अपराध क्षेत्र से ज्यादा आगे निकल चुका है। एक तरफ जहां समाज और घर-परिवार को नष्ट करने के लिए अवैध रूप से लाटरी टिकट का व्यापार तेजी से आगे बढ़ रहा है वहीं दुसरी और युवा पीढ़ी को नष्ट करने के लिए ड्रग्स ब्राउन शुगर जैसी नशीले पदार्थों का भी व्यापार फल-फूल रहा है। ड्रग्स ब्राउन शुगर जैसी नशीले पदार्थों के पैडलर को पुलिस ने कई बार गिरफ्तार करके जेल भेज चुके हैं पर इस नशीले पदार्थों को फेलाने वाले किंग-पिंग पुलिस के चंगुल से बचता रहा। इन बातों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि, लाटरी या ड्रग्स दोनों के पैडलर के माध्यम से पुलीस किंग-पिंगों तक पहुंच सकता है। जब तक गंगा के गंगोत्री तक पुलिस प्रशासन के हाथ नहीं लगेगा तब तक पुलिस प्रशासन के लिए यह एक बड़ा चुनौती बना रहेगा।

     

कोल्हान

  • घाटशिला अनुमंडल : अवैध लाटरी का गोरख धंधा, पुलिस के लिए बना चुनौती…
    घाटशिला अनुमंडल : अवैध लाटरी का गोरख धंधा, पुलिस के लिए बना चुनौती…

    घाटशिला अनुमंडल : अवैध लाटरी का गोरख धंधा, पुलिस के लिए बना चुनौती…

    संजय / दीपक …✍️

    पुरानी कहावत है, पुलिस डाल-डाल तो अपराधी पात-पात चलता है। यह और बात है कि, पुलिस मन बना लें तो पात-पात चलने वाले अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचने में देर नहीं लगता है । बाबजूद इसके अपराध का ग्राफ फ्लेक्सुएट तो होता है पर अब तक खत्म नहीं हो सका।यह इसलिए कह रहा हूं कि, घाटशिला अनुमंडल अनेक प्रखंडों और दर्जनों ताके समावेश से बना है।

    खबरों के अनुसार घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाना क्षेत्रो में अवैध लाटरी का गोरख धंधा चल रहा था। जुलाई के महीने में पूर्वी सिंहभूम जिले में नये वरिय पुलिस अधीक्षक डा. एहतराम वकारिब के योगदान करने के चंद दिनों के अंदर ही घाटशिला अनुमंडल के जिन थाना क्षेत्रों में अवैध लाटरी का धंधा चल रहा था वह बंद हो गया था। क्यों कि, नये वरिय पुलिस अधीक्षक डा. अहतेराम वकारिब अपने पदभार संभालते ही, पुरे जिले के पुलिस को हिदायत दी थी कि, किसी भी तरह का कोई अवैध और गैर-कानूनी धंधे बंद करना होगा। जिस थाना क्षेत्र में ऐसा पाया जाएगा उस थाने का प्रभारी जिम्मेदार माना जाएगा। और चौबीस घंटे के भीतर घाटशिला अनुमंडल मे होने वाली अवैध लाटरी का धंधा, अवैध बालू ढुलाई वगैरा थाना क्षेत्रों में चलना बंद हो गया। इस दौरान एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी किया गया था।

    लगता है, SSP साहब का कड़ा आदेश को घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाने वाले भूल गये है। दो महीने के अंदर फिर से अवैध लाटरी का धंधा घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाना क्षेत्रों में फिर से अपना फन उठाने लगा है।

    सवाल यह है कि, अगर वरिय अधिकारी के एक आदेश पर प्रभावित थाना प्रभारी लाटरी के अवैध कारोबार पर चौबिस घंटे के अंदर पुरी तरह अंकुश लगाने में सफल हुए थे तो फिर से यह खेला कैसे आरंभ हो पाया है ? क्या इस धंधे के रैकेट के बारे में पहले से ही जानकारी था प्रभावित थाने वालों को ? इन परिस्थितियों में कुछ प्रश्न तो वैसे पुलिस थाने का जवाबदेही तो बनता ही है।

    खबरों के अनुसार, कुछ दिनों से घाटशिला अनुमंडल के कुछ थाना क्षेत्र में फिर से अवैध लाटरी संचालन करने वाले गिरोह सजग हो गया है और अपने पैडलर के माध्यम से चौक-चौराहों में धंधा करना आरंभ कर दिया है। चुंकि, इस गोरख धंधे का संपूर्ण टीम भरे ही शांत बैठ गया था दो महीने के लिए।

    क्या फिर से घाटशिला अनुमंडल के हर कोने तक यह जहर फैलने लगा है जंगल की आग के तरह। यह पुरे पुलिस महकमे के लिए एक सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है?

    कुछ महिने पहले चाईबासा के एक यूट्यूब पत्रकार सुजित ने इस पुरे गोरख धंधे का एक स्टिंग आपरेशन के माध्यम से काला चिट्ठा खोल कर रख दिया। जिसमें पुलिस की मिली भगत से अवैध लाटरी संचालन चाईबासा में चलने की बात पैडलर ने खुफिया कैमरे के समक्ष कहा। सुजित ने यह भी जिक्र किया कि, कथित रुप से सिकंदर और घसिया नाम के दो शख्स इस खेल का मास्टर माइंड है।

    विश्वसनिय पुत्रों के अनुसार, घाटशिला अनुमंडल मे जहां कहीं भी अवैध लाटरी टिकट का खेल चलाया जाता है वह चाईबासा से ही सप्लाई किया जाता है। और घाटशिला अनुमंडल मे दर्जनों सफेद कालर और माफिया प्रबृत्ति वाले लाटरी टिकट बिक्री का थोक विक्रेता है। जिनके अधीन अनगिनत बेरोजगार पैडलर का काम करता है।

    सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में अवैध लाटरी का खेल एक दिन मे दो बार खिलाया जाता है। सबेरे 8 बजे और दुसरी पाली दोपहर 1 बजे खेल का टिकट मैदान में पहुंच जाता है। टिकटों में तिथि और समय स्पष्ट उल्लेख रहता है। 

    खबरों के अनुसार, जिस किसी भी थाना क्षेत्रों में यह गोरख धंधे चलाया जाता है वहां कम से कम दो या तीन महाजन यानी क्षेत्र के मुख्य सप्लायर होता है। इसका किंग पिन शहर में कोई भी हो सकता है। चाहे वह माफिया प्रबृत्ति वाले या कोई नामचीन कपड़ा व्यापारी या तो फिर किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ इंसान भी हो सकता है! कोई भी हो सकता है। 

    खास बात यह है कि, इन दिनों कुछ किंग-पिंग अपने पैडलर के हाथों में टिकट का हार्ड कापी नहीं देकर साफ्ट कापी देखें हैं। पैडलर अपने एंड्रायड स्मार्टफोन फोन पर टिकटों का तस्वीरें खींच लेता है। हर पैडलर अलग-अलग एक सीरीज का साफ्ट कापी रखता है। यानी एंड्रायड स्मार्टफोन फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से लाटरी के टिकट खरीदारों तक उनके मन-पसंद नंबर का टिकट पहुंच जाता है। दुसरी और कुछ पैडलर लाटरी के हार्ड कापी लेकर अपने मंजिल तक पहुंच जाते हैं। कायदे से छापेमारी हो तो फोन और हार्ड कापी दोनों पुलिस को गंगा से गंगोत्री तक ले जा सकता है। क्यों कि, कानून ने उन्हें तफ्तीश करने का अधिकार दे रखा है। पत्रकार के लिए एक दायरा होता है। एक पत्रकार क्लू दे सकता है। शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि, उस क्लू के माध्यम से नियत के साथ आगे बड़े। 

    खास बात है, कि इस पुरे प्रकरण में पैडलर का एरिया फिक्स होता है। एक पैडलर दुसरे पैडलर के एरिया में आम तौर पर दखल अंदाजी आम तौर पर करना पसंद नहीं करता हैं। खबरों के अनुसार एक पैडलर प्रतिदिन दौ सौ से चार सौ रुपया कमिशन के तौर पर कमा लेता है। वहीं इस खेल के संचालक पुरे महीने में लाखों रुपया का मुनाफा उठाता है। सूत्रो के अनुसार, प्रत्येक सप्ताह लगभग 15 से 20 राख रुपया का इस क्षेत्र में अवैध लाटरी का खेल खेला जाता है। पैडलर मुख्य रुप से रेलवे स्टेशन, मैक्सी – टेक्सी स्टैंड, चौक-चौराहे और मुख्य सड़क के किनारे कहीं घात लगाकर बैठे रहते हैं। खबरों के अनुसार, क्षेत्र में इस तरह के कारोबारों को चलता देख कुछ सामाजिक लोग, डा. अहतेराम वकारिब SSP से मिलकर शिकायत करने का मन बना रहें हैं 

    बहरहाल, घाटशिला अनुमंडल मे पिछले कुछ वर्षों में अपराध क्षेत्र से ज्यादा आगे निकल चुका है। एक तरफ जहां समाज और घर-परिवार को नष्ट करने के लिए अवैध रूप से लाटरी टिकट का व्यापार तेजी से आगे बढ़ रहा है वहीं दुसरी और युवा पीढ़ी को नष्ट करने के लिए ड्रग्स ब्राउन शुगर जैसी नशीले पदार्थों का भी व्यापार फल-फूल रहा है। ड्रग्स ब्राउन शुगर जैसी नशीले पदार्थों के पैडलर को पुलिस ने कई बार गिरफ्तार करके जेल भेज चुके हैं पर इस नशीले पदार्थों को फेलाने वाले किंग-पिंग पुलिस के चंगुल से बचता रहा। इन बातों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि, लाटरी या ड्रग्स दोनों के पैडलर के माध्यम से पुलीस किंग-पिंगों तक पहुंच सकता है। जब तक गंगा के गंगोत्री तक पुलिस प्रशासन के हाथ नहीं लगेगा तब तक पुलिस प्रशासन के लिए यह एक बड़ा चुनौती बना रहेगा।

     

संथाल

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